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60 Varsh Se Upar Ke "Yuvaon" Ke Liye Fashion Show : 10 April, 2016

Posted on 18-Aug-2018 04:33 PM
60 वर्ष से ऊपर के ‘‘युवाओं’’ के लिए फैषन शो : 10 अप्रैल, 2016 
 
बचपन से स्कूल की किताबों में पढ़ते आए थे कि भारत एक ऐसा देश है जिसमें विभिन्न भाषा, विभिन्न पहनावा, विभिन्न खानपान यहाँ तक कि रीति-रिवाज़ों में भी विभिन्न लोग हैं.... लेकिन इस विविधता में भी हम सब एक सूत्र में पिरोए से रहते हैं, यह सूत्र है भारतीयता का। तारा संस्थान ने जब आनन्द वृद्धाश्रम प्रारंभ किया था तो सबसे पहले कुछ लोग रहने आए थे उनमें एक आंटी श्रीमती शांता देवी पौद्दार थी और एक ब्वनचसम श्री दिगेन्द्र नाथ जी लहरी और श्रीमती अंजली लहरी थे। शांता देवी जी उदयपुर की ही हैं और अग्रवाल समाज की हैं और लहरी दम्पती कोलकाता के रहने वाले थे और पारंपरिक बंगाली थे। आनन्द वृद्धाश्रम को प्रारंभ हुए लगभग 4 वर्ष होने जा रहे हैं, शांता देवी जी अभी भी हमारे साथ रह रही हैं, श्री दिगेन्द्र नाथ जी का कुछ साल पहले स्वर्गवास हो गया था लेकिन अंजली आंटी अभी भी हमारे साथ रह रही हैं। इन चार वर्षों में बहुत से लोग आए, कुछ लोगों के लिए आनन्द वृद्धाश्रम घर बना, कुछ वापस अपने घर चले गए.... लेकिन यहाँ आने और रहते वालों में भी वो ही विविधता थी, और है जैसी हमारे भारतवर्ष में है।
आनन्द वृद्धाश्रम में जम्मू के बक्शी अंकल हैं तो गुजरात के चिमन भाई हैं। मुम्बई के प्रदीप जी और विवेक जी हैं तो बंगाल की अंजली आंटी और दत्ता साहब हैं। यहाँ तक की झारखण्ड के अंकल भी हैं और आसाम से अनिल जी और उनकी माताजी हैं....। राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश आदि से तो लोग हैं ही, यानि की पूरा भारत इसमें समाया है और सबसे बड़ी बात कि ये इन सभी लोगों को एक सूत्र में बांधे रखने के लिए तारा संस्थान के जो दानदाता हैं वो भी तो अपनी सारी विविधताओं के साथ मौजूद हैं....। मैंने आज तक ऐसा कोई दानदाता नहीं देखा जिन्होंने यह कहा हो कि मेरी ये राशि केवल गुजराती वृद्धजन पर ही खर्च करना या बंगाली या किसी और पर खर्च न करना... यही खुबसूरती है ‘‘मानवता’’ या ‘‘इंसानियत’’ की जो धर्म, समाज, जाति, प्रदेश सबसे परे है....।
आप सोच रहे होगें कि मैं इस लेख में ये क्या बात कर रही हूँ.... पर ये सब बात करने के लिए मेरा एक आशय है और इस आशय को बताते हुए मेरे मन में इतना उत्साह है कि लिखते हुए ऐसा लग रहा मानो प्रत्यक्ष आपसे ही बात कर रही हूँ... तो अब मैं सीधी मुद्दे पर आती हूँ....
10 अप्रैल, 2016 को तारा संस्थान बुजुर्गों के लिए एक ‘‘फैशन शो’’ आयोजित करने जा रही है.... नाम ‘‘फैशन शो’’ या कुछ भी हो सकता है लेकिन मूल बात है हमारी संस्कृति को स्टेज पर दिखाना और स्टेज पर होंगें आप सभी जो ये पढ़ रहे हैं... जी हाँ हमारे दानदाता जो कि तारा का वृहद परिवार हैं। अब तक दानदाताओं के जो भी कार्यक्रम ‘‘तारा’’ या नारायण सेवा में हुए उसमें आप सभी का सम्मान हुआ, आप में से कुछ मंच पर बैठे, कुछ नीचे कुर्सियों पर। लेकिन यह कार्यक्रम थोड़ा अलग है... इसमें आप सभी आएगें और हम आपका सम्मान तो करेंगे ही लेकिन आप सभी को मंच पर आना होगा और अपने प्रदेश की वेशभूषा में मंच पर ‘‘त्ंउच ॅंसा’’ यानी कि थोड़ा इठलाते हुए चलना होगा....।
जब मैं यह लिख रही हूँ तो मन में सोच करके ही कुछ कुछ हो रहा है कि हमारी गुजरात से आने वाली आंटियाँ सीधे पल्ले की गुजराती साड़ी में और अंकल कच्छी पजामा और कुर्ता पहने डांडिये की धुन पर थिरकते हुए आँऐंगे तो क्या मस्त नज़ारा होगा.... और मुझे पूरा यकीन है कि आप सभी यह पढ़ रहे होगे तो आपके मन में भी हूक उठ रही होगी क्योंकि उम्र के इस पड़ाव पर तो कभी पोते पोतियों को स्कूल में ही स्टेज पर देखा करते हैं लेकिन आप खुद स्टेज पर होंगे और बच्चे दर्शक! यकीन मानिये तारा संस्थान के साथ बिताए ये दो दिन आप सभी के लिए जीवन के यादगार पल होगें।
और हाँ सबसे प्उचवतजंदज बात तो बताना भूल ही गई यह ‘‘फैशन शो’’ केवल 60 वर्ष से ऊपर के महानुभावों के लिए होगा यानि कि जिनकी उम्र तो उन्हें वरिष्ठ नागरिक का दर्जा देती है लेकिन उनमें जोश व जज्बा नौजवानों जैसा हो।
मुझे पूरा यकीन है कि आप सभी इस कार्यक्रम में बढ़चढ़कर हिस्सा लेंगे और ये सारे प्रदेशों का ‘‘सांस्कृतिक समागम’’ हम सबके दिलों पर अमिट छाप छोड़ेगा।
यह कार्यक्रम तारा संस्थान के दानदाताओं हेतु है और आप सभी के मनोरंजन एवम् असहाय बुजुर्गों के कल्याण हेतु किया जा रहा है।
 
े 60 से ऊपर के युवा ही इसमें भाग ले सकेंगें।
े प्रतियोगिता में उपस्थित होने की पूर्व सूचना अवष्य देवें।
े दिनांक 10 अप्रैल, 2016 प्रातः 9 बजे तक उदयपुर निष्चित पहुँचें।
े ‘‘रैम्प वॉक’’ (फैषन षो) की रिहर्सल की व्यवस्था की जाएगी।
े आपको साथ में अपने पसंदीदा दो जोड़ी ड्रेस लानी है  - ‘‘रैम्प वॉक’’/ फैषान षो हेतु।
े आपके आवास, भोजन व परिवहन की सम्पूर्ण व्यवस्था तारा संस्थान द्वारा की जाएगी।
 
कल्पना  गोयल

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