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Anand Vrudhashrm Visheshaank Kyon?

Posted on 18-Aug-2018 04:29 PM

आनन्द वृद्धाश्रम विशेषांक क्यों?


तारांशु एक माध्यम है हमारी बात आप तक पहुँचाने का... और तारा संस्थान जो कुछ कर पा रही है वो तभी संभव है जब आप सभी का सहयोग बना रहे और यह सहयोग निरंतर बना रहे यह भी आवश्यक है क्योंकि कोई हमें साल में एक बार, कोई 6 महीने में एक बार, कोई महीने में एक बार सहयोग देता है या ये भी हो सकता है कि केवल एक ही बार सहयोग करें... लेकिन कहते है ना कि बूंद-बूंद से घड़ा भरता है तो बस ‘‘तारा’’ का ये घड़ा आप सब के सहयोग से भरता है और इस घडे़ के अमृत से.... जी हाँ ये अमृत ही तो है जो न जाने कितने बुजुर्गों, विधवा महिलाओं के चेहरे की मुस्कुराहट वापस लाता है।
आप कल्पना कीजिए कि एक बुजुर्ग जिसके बच्चों ने उसे छोड़ दिया हो, उसके पास कोई पैसा नहीं हो और अब वो कोई काम भी नहीं कर सकता हो क्योंकि शरीर भी तो उम्र के साथ-साथ थक गया है, वो कहाँ जाए......?
या फिर एक ऐसी माँ जिसको मोतियाबिन्द के कारण दिखना बंद हो गया है उसे पता है कि ऑपरेशन हो सकता है लेकिन बेटे के ऊपर निर्भर है और बेटा भी जानता है कि माँ का ऑपरेशन हो सकता है लेकिन उसके पास इतने पैसे नहीं कि ऑपरेशन करा सके क्योंकि जिम्मेदारियाँ पहले ही बहुत हैं..... तो वो भी मुँह सिल के बैठा है.... अब माँ क्या करे....? या एक छोटी सी लड़की जिसकी उम्र 20-22 या 25-30 है उसका पति नहीं रहा.... समाज की विषमता है पर अभी भी एक हकीकत है कि विधवा का विवाह नहीं होता है.... छोटे-छोटे बच्चे हैं जो पढ़ रहे हैं.... अब वो क्या करें....?
....या एक गाँव का बुजुर्ग जोड़ा.... शरीर से बहुत ही दुर्बल। एक ही बेटा है जो सूरत या मुंबई काम पर गया और फिर वहीं का होकर रह गया। गाँव में थोड़ी बहुत जमीन है वो भी बंजर और वैसे भी शरीर इतना दुर्बल, तो क्या करें, कैसे करें दो वक्त के भोजन की व्यवस्था..? ये ही कुछ प्रश्न हैं जिनके उत्तर में तारा काम कर रही है..... तारांशु का यह अंक हमारे आंनद वृद्धश्रम को समर्पित है..... विशेषांक इसलिए है कि रुटिन में अपको बता ही नही पाते हैं। कुछ दर्द तो मिलेगा इस विशेषांक में क्योंकि द़र्द नहीं होता तो कौन बुजुर्ग घर छोड़कर वृद्धाश्रम आता.....? तो बस इन सबने हमसे बांटा और हम आपसे बांट रहे... क्योंकि कहते है ना कि बांटने से दर्द हलका हो जाता है।
आप सभी का प्यार मिलता रहे...
आपको व आपके सारे परिवार को दीपावली की शुभकामनाओं के साथ!

कल्पना  गोयल

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