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Fir Bhi Dil Hai Hindustani...!

Posted on 20-Aug-2018 11:42 AM
फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी!
 
फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी.... अभी जून माह में कल्पना जी और मैं यू.के. (इंग्लैण्ड) गए, मकसद था नए बन रहे वृद्धाश्रम के लिए सहयोग जुटाना, हमारी यह यात्रा यू.के. में तारा संस्थान की सहयोगी संस्थान ‘‘भारत वेलफेयर ट्रस्ट’’ द्वारा आयोजित की गई थी। वहाँ पर अलग-अलग शहरों में भजन के कार्यक्रम आयोजित किए गए और पधारे लोगों से दान की अपील भी की, सहयोग तो मिला ही लेकिन साथ में प्यार अपार मिला, इतना कि आप गद्गद् हो जाएँ और विदेश ही क्या देश में भी जहाँ कहीं जाना होता है आप लोग मानो प्रेम में भिगो देते हैं। 
देश-विदेश की बात चली तो इंग्लैण्ड का एक प्रसंग याद आ गया, एक जगह हम कार्यक्रम कर रहे थे तो संचालन करते वक्त मैंने वहाँ के भारतीयों से भारत प्रेम की तारीफ की तो एक महानुभाव ने थोड़ा जोश में कह दिया कि यहाँ के लोगों में देश प्रेम भारत में रहने वालों से ज्यादा है। बात मुझे थोड़ी सी अखर गई तो मैंने विनम्रता पूर्वक कहा कि आप जो विदेश में रहते हैं और हम जो देश में रहते हैं वो भारत-माता के दो बेटों की तरह हैं। आप माँ से थोड़ा दूर हैं तो माँ को शायद ज्यादा याद करते हैं और हम तो माँ के साथ ही रहते हैं तो हमें ज्यादा याद करने की जरूरत ही नहीं पड़ती वरना देश प्रेम तो हर भारतीय के दिल में उतना ही है चाहे वो विश्व में कहीं भी रह रहा हो। 
मुझे समझ आने के बाद से अब तक एक युद्ध हुआ है ‘‘कारगिल युद्ध’’ और 1999 में जब ये हुआ था तब सारा भारत एक था, जाति, समाज, धर्म, गरीब अमीर हर कोई भारतीय फौज के साथ था। सबके दिलों में एक सी आग थी हर फौजी के शव पर हर भारतवासी रोता था।
हाँ, लेकिन मुझे विदेशों में बसे भारतियों की एक बात अच्छी लगी कि वे अपनी संस्कृति को बचा कर रखें हुए हैं। वहाँ हर त्योहार हर उत्सव उसी धूमधाम से मनाया जाता है जैसे अपने यहाँ मनाते हैं और हर कार्यक्रम में महिला और पुरुष इतने अच्छे से पारम्परिक पोशाकों में सज कर आते हैं। लगता है मानो शादी ब्याह में आए हों खास तौर पर महिलाएँ। और वे खासतौर पर देश में रहने वाले जरूरतमंद लोगों की फिक्र करते हैं तभी तो वे दिल खोल कर मदद करते हैं। 
अभी पिछले डेढ़ दो माह में वृद्धाश्रम में रहने के लिए 7-8 बुजुर्ग आए। कुछ को फरीदाबाद, कुछ को इलाहाबाद वृद्धाश्रम भी भेजा ताकि उदयपुर में थोड़ी जगह रहे यह इसलिए करते हैं क्योंकि कोई भी वृद्धाश्रम में रहने के लिए आते हैं तो सीधे उदयपुर ही आते हैं तो उन्हें एकदम से कुछ दिन तो रख ही लें सो उदयपुर में थोड़ी जगह बनाकर रखनी होती है। आप लोगों के सहयोग से नए वृद्धाश्रम की तीसरी छत डल गई है और उम्मीद है कि अप्रैल, 2018 में आपको निमंत्रित करेंगे उद्घाटन में पधारने को। लेकिन, अभी बहुत सा काम बाकी है और इस प्रकल्प में आप सब सहयोग करेंगे तभी यह पूरा हो पाएगा तो ‘‘साथी हाथ बढ़ाना... एक अकेला कहीं थक न जायें।’’
यही भाव लेकर हम यू.के. भी गए थे क्योंकि भले ही वो अलग मिट्टी में बस गए लेकिन उनका भी दिल तो हिन्दुस्तान के लिए ही धड़क रहा है।
आदर सहित....!
 
दीपेश मित्तल

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