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Humara Kunaba Itna Bada Hone Laga Ki Har Ghar Chhota Padne Laga

Posted on 10-Dec-2019 11:24 AM

हमारा कुनबा इतना बड़ा होने लगा कि हर घर छोटा पड़ने लगा

अभी थोड़े दिनों पहले उदयपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज के ऑर्थापेडिक वार्ड से फोन आया कि एक महिला है जिनका कोई नहीं है वो लगभग एवं माह से बीमार थी कुछ फ्रेक्चर था पैर में, वो फ्रेक्चर अब ठीक हो गया है और उनका कोई नहीं है तो आप उनको तारा के वृद्धाश्रम में रख लेवें। हमने राजेश जी जो वृद्धाश्रम इंचार्ज हैं उन्हें उनसे मिलने भेजा, पता लगा कि उनका फ्रेक्चर तो ठीक हो गया है लेकिन वो बिस्तर पर ही है। उदयपुर से लगभग 100 कि.मी. दूर आवरी माता की रहने वाली है और मानसिक रूप से भी ठीक ही लगी तो अगले दिन गाड़ी भेजकर उन्हें बुलवा लिया। एक दिन बाद जब मैं वृद्धाश्रम गई तो मुझे बताया गया कि वो कुछ खा नहीं रही है तो मैं उनके पास गई, उनसे नाम पता पूछा तो उन्होंने अच्छे से बता दिया, फिर उन्हें खिचड़ी खिलवाई तो उन्होंने एक दो चम्मच खा ली तो मुझे तसल्ली आई क्योंकि बिना खाए तो वो कैसे स्वस्थ रह पाती। राजेश जी को बोला कि ग्लूकोस मंगवाकर उन्हें हर एक दो घंटे में पिलवाएँ जिससे उनके शरीर में ताकत रहे और जैसा भी खाएँ थोड़ा बहुत अवश्य खिलाएँ।

अभी जब ये लेख लिखने बैठी हूँ तो लगता है कि वृद्धाश्रम जब शुरू किया तब तो कोई सोच ही नहीं थी बस ये देखा कि तारा के आई कैम्प्स में बहुत से बुजुर्ग ऐसे आते थे जिनके बच्चे या तो बाहर थे या केयर नहीं करते थे। सो लगा कि एक वृद्धाश्रम खोल लेते हैं जिससे इन बुजुर्गों को घर मिल जाएगा। शुरू में 25 लोगों की व्यवस्था की तब आशंका थी कि ये 25 बैड भी भरेंगे क्या? क्योंकि मैंने कई वृद्धाश्रमों के बारे में सुना था कि भवन तो बन गया लेकिन रहने वाले नहीं आए क्योंकि हमारा समाज अभी भी वृद्धाश्रम को उतनी स्वस्थ परंपरा नहीं मानता है। ये भी लगता था कि उदयपुर और आस-पास से कितने बुजुर्ग वृद्धाश्रम में आ जाऐंगे रहने। लेकिन सब कुछ वैसा होता नहीं जैसा हम सोचते हैं। फरवरी 2012 में शुरू हुआ आनन्द वृद्धाश्रम 7-8 महीने में ही भरने लगा और जो सबसे पहले रहने आए थे उनमें उदयपुर के एक पुरुष और एक महिला तो थे ही उनके अलावा कोलकाता का एक बंगाली कपल और मुम्बई के प्रदीप जी थे। प्रदीप जी तो अभी भी आनन्द वृद्धाश्रम में रह रहे हैं। हमें भी नहीं पता कैसे लेकिन पूरे भारत से बुजुर्ग आने लगे और तारा संस्थान के आनन्द वृद्धाश्रम का परिवार बढ़ने लगा। जैसे-जैसे लोग रहने आने लगते वैसे-वैसे हम उनके लिए जगह बनाते रहते। पहले एक कमरा बढ़ाया फिर तारा नेत्रालय, उदयपुर के वार्ड को बाहर बरामदे में शिफ्ट करा और एक हाल और वृद्धाश्रम को दिया लेकिन जैसे ईश्वर को पता था कि आप लोग हमारे साथ हैं तो तारा से कोई निराश सिर्फ इसलिए नहीं जाए कि वृद्धाश्रम में जगह नहीं है तो नये वृद्धाश्रम के लिए जमीन खरीदी और उस पर अलग वृद्धाश्रम भवन बन गया।

22 अप्रैल, 2018 को यह भवन बना और इसमें लगभग 150 से अधिक बुजुर्गों के रहने की व्यवस्था थी। अभी भवन को बने 2 साल भी पूरे नहीं हुए हैं और यह भवन भरने लगा है वो भी तब जब कि संस्थान का वृद्धाश्रम प्रयागराज व एक वृद्धाश्रम फरीदाबाद में चल रहा है और साथ ही एक राजकीय वृद्धाश्रम उदयपुर में भी चला रहे हैं। ये तो आपका और हमारा सौभाग्य है कि हम सब मिलकर लगभग 175 बुजुर्गों को वो सुख दे रहे हैं जिसके वे हकदार हैं क्योंकि पूरी जिन्दगी जिन्होंने अपने बच्चों को अच्छा जीवन देने के लिए अपना सुख त्यागा, उन्हें उम्र के इस पड़ाव में तो सुकून चाहिए ही जब उनका शरीर साथ न दे रहा हो। हमें भी नहीं पता कि ये कैसे हो गया कि धीरे-धीरे कर पूरा भारत इस आनन्द वृद्धाश्रम में समा गया; बिहार, बंगाल, उड़ीसा, झारखण्ड, असम, न जाने कहाँ-कहाँ से बुजुर्ग आने लगे और हमारा कुनबा इतना बड़ा होने लगा कि हर घर छोटा पड़ने लगा। लेकिन मेरे पापा हमेशा कहते हैं कि ईश्वर जैसे-जैसे तूफान भेजता है वैसे-वैसे लंगर भी देता है बस जरूरत है कि कैसे सही समय पर सही उपयोग उस लंगर का किया जाये। 

इस बार भी हम तैयार हैं, बाढ़ आने से पहले पाल बांध रखी है। यानी कि संस्थान ने उतना ही बड़ा एक प्लाट ले रखा है जिसपर नया वृद्धाश्रम बना है और एकदम नजदीक है उसी वाले वृद्धाश्रम के। तो जब अब नया वृद्धाश्रम दो तिहाई भरने लगा कि तो हम आपके पास सहयोग की योजना लेकर आए हैं भूमि के लिए। हमें तो लगता था कि अभी और वृद्धाश्रम भवन बनाने में थोड़ा समय लगेगा लेकिन शायद विधाता के मन में यही है कि हम और आप निमित्त बने, ज्यादा से ज्यादा लोगों के अंतिम कुछ  वर्षों को खुशनुमा बनाने में। आप सभी जिनके दम पर हम ये सारे कार्य कर रहे हैं वो भूमि सहयोग बनकर इस नये भवन की दिशा में संस्थान का हाथ थाम सकते हैं। योजना का प्रारूप निम्न हैः

तारा संस्थान के अन्तर्गत

आनन्द वृद्धाश्रम

प्रस्तावित नवीन परिसर हेतु भूमि अनुदान

भूमि हेतु सहयोग करने वाले दानदाताओं के नाम प्लॉट के मुख्य द्वार के दोनों और स्वर्णाक्षरों में अंकित किए

जाएंगे और भूमि पूजन के समय आप सभी को निमंत्रित कर आपका सम्मान किया जाएगा।

भूमि सेवा ‘‘रत्न’’ 1,00,000 रु.

भूमि सेवा ‘‘मनीशी’’ 51,000 रु.

भूमि सेवा ‘‘भूशण’’ 21,000 रु.

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