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Khushiyo Bhari Deepawali

Posted on 20-Aug-2018 11:49 AM

खुशियों भरी दीपावली

त्योहार कोई भी हो वो प्रतीक ही खुशियों का होता है और दीपावली तो हमारा सबसे बड़ा त्योहार है। हर व्यक्ति चाहे तो गरीब हो या अमीर अपने-अपने तरीके से खुशियाँ मनाता है और वैसे भी खुशी का मापदंड कभी भी धन रहा ही नहीं है। मेरा कभी भी यह मानना नहीं रहा कि व्यक्ति के पास धन नहीं होना चाहिये और मुझे यह लगता है कि अच्छा रहन-सहन बच्चों की अच्छी शिक्षा और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए धन भी आवश्यक है। लेकिन, साथ ही जीवन में खुशियाँ अनिवार्य रूप से होनी चाहिए चाहे हमारे यहाँ हर त्योहार पर लोग नाचते गाते हैं चाहे वो जन्माष्टमी का मटकी फोड़ हो या गणपति विसर्जन की धूम हो या नवरात्रि में गरबा हो और इस खुशी में सभी एक समान लगते हैं चाहे पाश कॉलोनी के निवासी हों या कच्ची बस्ती के। तारा संस्थान में भी तो आप और हम मिलकर खुशियाँ बांटने का काम ही तो कर रहे हैं, कैसे? वैसे तो आप जानते ही हैं लेकिन एक छोटी सी घटना बताती हूँ। अभी कुछ दिनों पहले मेरे पास माउंट आबू के पास के एक कस्बे सरूपगंज से कुछ युवा एक बुजुर्ग को लेकर आये। उन बुजुर्ग का नाम श्री विनोद अग्रवाल है, उन्हें लाने वालों ने बताया कि विनोद जी चाय का ठेला लगाते थे और इनका कोई परिवार नहीं है। विनोद जी को पैरालिसिस हो गया और शरीर का एक तरफ का हिस्सा काम नहीं कर रहा है और इस कारण वे कुछ काम नहीं कर पा रहे, सो ऐसे ही इधर-उधर रहकर जीवन गुज़ार रहे हैं। मैंने जब विनोद जी को देखा तो एकदम मलीन चेहरा और कपड़े, दुर्बल शरीर, एक पैर के नीचे गंदी सी पट्टी बंधी थी। पूछने पर पता चला कि चोट लगी थी सो पट्टी करवाई थी लेकिन पट्टी की दशा से प्रतीत हो रहा था कि बहुत दिन से पट्टी बदली नहीं थी। विनोद जी को नया घर मिल गया और हमें परिवार का नया सदस्य। विनोद जी को रहते कुछ दिन हो गए उनको अस्पताल भेज कर पट्टी भी नई करवाई और अब हर दूसरे दिन ड्रेसिंग भी हो रही है। अभी जब विनोद जी से मिलती हूँ तो लगता है कि एकदम दूसरा आदमी हो क्योंकि अच्छा खाना-पीना और मेडिकल केयर से उनका शरीर थोड़ा तंदरूस्त हुआ और निखर गया है। मन ही मन मैं उन युवकों को धन्यवाद देती हूँ जिन्होंने उस व्यक्ति की सुध ली जिससे उनका कोई रिश्ता नहीं था, पूरा पता करके उन्हें तारा तक पहुँचाया और कहा कि हम आते रहेंगे वरना आजकल किसको वक्त है बाजार में पड़े एक बीमार वृद्ध को सही जगह पहुँचाने का। तो जैसा मैंने कहा उन युवकों को सुख मिला किसी को सही आसरा दिलवाने का, हमें खुशी इस बात की कि विनोद जी स्वस्थ हो रहे और आप सब जो हमसे जुड़े हैं वो भी तो इस खुशी के भागीदार हैं क्योंकि आप न होते तो ये खुशियाँ न उन युवकों को मिलती न हमें और विनोद जी भी पता नहीं क्या करते। विनोद जी और उनके जैसे कुछ लोग जिन्हें एक वर्ष से कम तारा के आनन्द वृद्धाश्रम में हुआ है एक नये परिवार के साथ दीपावली मनाएँगे बिलकुल वैसे जैसे आप और हम मनाते हैं जैसा कि हम बचपन में दीपावली पर निबंध में लिखते थे कि दीपावली पर नये कपड़े पहनते हैं, दीपक जलाते हैं, लक्ष्मी जी के पूजा करते हैं, आतिशबाजी करते हैं, परिवार के लोग मिल बैठकर खुशियाँ बांटते हैं। तो बस वैसा ही परिवार हमारा आनन्द वृद्धाश्रम है जहाँ तो सब कुछ होता है। मेरे पास शब्द नहीं है आप सभी दानदाताओं को धन्यवाद देने का क्योंकि आप सहयोग न देते तो ये कुछ नहीं होता, विनोद जी के लिए वो ईश्वर कुछ सोच ही लेता लेकिन हम यह सुख कहाँ पर पाते...

आप सभी को प्रणाम के साथ आपको और परिवार को दीपावली की ढेर सारी शुभकामनाएँ...
आदर सहित...!

कल्पना गोयल

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