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Manthan

Posted on 01-Aug-2019 10:28 AM

मंथन

अभी कुछ समय पहले ही मेरी मुलाकात चिराग 5 वर्ष, अनिकेत 8 वर्ष व उनकी माँ पायल जिनकी उम्र 27 वर्ष भी नहीं होगी से हुई... चिराग अपने पापा को बहुत याद करता है, रोता है.... पायल ने बताया कि उनके पति की उम्र 28 वर्ष थी व सिर्फ उल्टी दस्त हो हुए और अस्पताल में इलाज के वक्त ही उनकी मृत्यु हो गई। पायल अपने दोनों बच्चों का एडमिशन शिखर भार्गव पब्लिक स्कूल में करवाने व गौरी योजना में अपना नाम जुड़वाने आई थी और जब ज्यादा बात हुई तो उसने बताया कि ससुराल वाले कह रहे तुम तीनों घर से निकल जाओ।

गौरी योजना 2011 तारा संस्थान के शुरूआत से ही मेरे दिल को सुकून देती रही है, छोटी बच्चियाँ 22 से 35 उम्र की, जिनकी शादी 18 या 19 वर्ष में ही कर दी गई और अकस्मात उनकी हँसती मुस्कुराती जिन्दगी आँसुओं में डूब गई। जब इन महिलाओं से मुलाकात होती है तो सबसे बड़ी पायल की तरह ही समस्या जो मेरे अनुभव में अब तक सामने आई है वो है कि कुछ महिलाओं के ससुराल पक्ष वाले बेहद राक्षसीय व्यवहार करते हैं एवं मृत्यु के कुछ दिनों बाद ही अपनी बहुत एवं पोता-पोती को पर से बाहर निकाल देते हैं, अब उस अबला नारी के पास एकमात्र सहारा उसका मायका होता है और निम्न आर्य वर्ग में वैसे ही परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होती है, अतः भावनात्मक टूटन के साथ-साथ ही ये चिन्ता बड़ी हो जाती है, कैसे सबका पेट भरा जाये.....?

प्रश्नचिह्न ये है कि महिला के ससुराल वाले अपनी ही बहू और बच्चों के साथ इतना विषम व्यवहार कैसे कर पाते हैं, उन्हीं के बेटे का परिवार है, जिसे अभी उनके संबल और विश्वास प्यार की अधिकतम जरूरत जिन्दगी के इस वक्त में है उसी वक्त में उसे वे गहरी पीड़ाओं का दोहराव कर रहे हैं..... इस अनुत्तरित ­प्रश्न का जवाब नहीं है, मेरे पास..... बस 1000 रु. आप द्वारा गौरी योजना के रूप में...... ‘‘एक माँ को अनुपम उपहार’’ उनके जिगर के टुकडे़ की पढ़ाई की चिन्ता को दूर किया है आदरणीय भार्गव सा. ने ‘‘निःशुल्क शिक्षा, विधवा महिलाओं के बच्चों हेतु’’ देकर..... 1000 रु. को माह जुलाई 2000 रु. कर दिया गया है, निश्चित ही आप भी ये जानकार तसल्ली महसूस करेंगे एवं महंगाई के इस दौर में हमारे दानवीर दानदाता भी थोड़ा अधिक दयालु होंगे। 

एक ही उपाय है कि ‘‘बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ’’ एवं इस नारे को सार्थक करने में हम पूरा योगदान करें, अपनी छोटी कोशिशों से।

मस्ती भरी पाठशाला भी ऐसा ही एक कदम है जिसके आप सबकी आर्थिक मदद से, वो बच्चों की होठों की मुस्कुराहट बड़ी हो रही है।

कल्पना गोयल

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